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कालीबंगा सभ्यता: इतिहास, उत्खनन, प्रमुख साक्ष्य एवं राजस्थान की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत

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📖 ऐतिहासिक एवं सैद्धांतिक पृष्ठभूमि

प्रस्तावना एवं भौगोलीय अवस्थिति

कालीबंगा (Kalibangan) भारतीय उपमहाद्वीप में सैंधव सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल है। यह स्थल वर्तमान भारत के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले में प्राचीन सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदी के बाएं तट पर स्थित है। 'कालीबंगा' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'काले रंग की चूड़ियाँ' होता है। यह नामकरण इस स्थल पर अत्यधिक मात्रा में पाई गई मिट्टी (पक्की मिट्टी) तथा काँच से निर्मित काले रंग की चूड़ियों के अवशेषों के कारण हुआ है। यह स्थल न केवल हड़प्पा कालीन संस्कृति को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह प्राक्-हड़प्पा (Pre-Harappan) और उत्तर-हड़प्पा (Post-Harappan) संस्कृतियों के क्रमिक विकास का भी एक दुर्लभ पुरातात्विक दस्तावेज़ प्रस्तुत करता है।

खोज एवं विस्तृत उत्खनन का इतिहास

कालीबंगा की पुरातात्विक खोज और उत्खनन का इतिहास भारतीय इतिहास लेखन में एक स्वर्णिम अध्याय है। स्वतंत्रता पूर्व काल में प्रथम बार इटली के प्रसिद्ध भाषाविद और भारतविद डॉ. एल. पी. टेसीटोरी (L.P. Tessitori) ने इस क्षेत्र में एक अत्यंत प्राचीन सभ्यता के अवशेष होने की संभावना व्यक्त की थी और ध्यान आकर्षित किया था। हालाँकि, वे इसकी वैज्ञानिक पहचान नहीं कर पाए थे।

स्वतंत्रता के पश्चात, वर्ष 1952 में भारतीय पुरातत्व वैज्ञानिक अम्लानंद घोष (Amlananda Ghosh) ने सर्वप्रथम इस प्राचीन स्थल की प्रामाणिक पहचान की और इसकी खोज की। इसके उपरांत, वर्ष 1961 से 1969 के मध्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रसिद्ध पुरातत्वविदों बी. बी. लाल (बृजवासी लाल) तथा बी. के. थापर (बालकृष्ण थापर) के कुशल निर्देशन में यहाँ व्यापक स्तर पर उत्खनन कार्य संपन्न हुआ। उत्खनन के दौरान भू-गर्भीय एवं सांस्कृतिक साक्ष्यों को पाँच विभिन्न स्तरों (Five Stratigraphic Levels) में विभाजित कर अध्ययन किया गया, जिनमें प्रथम दो स्तर प्राक्-हड़प्पा काल से तथा अंतिम तीन स्तर विकसित हड़प्पा काल से संबंधित हैं।

नगर नियोजन, स्थापत्य एवं जल निकासी व्यवस्था

कालीबंगा का नगर नियोजन सिंधु घाटी सभ्यता की पारम्परिक 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) अथवा 'चेस-बोर्ड पैटर्न' (शतरंज की बिसात) पर आधारित था। नगर दो मुख्य भागों में विभाजित था: पश्चिमी टीला (दुर्ग क्षेत्र) और पूर्वी टीला (निचला नगर)।

  • द्वि-प्राचीर सुरक्षा (Fortification): कालीबंगा की सबसे अनूठी विशेषता यह थी कि इसका दुर्ग क्षेत्र (Citadel) और निचला शहर (Lower Town) दोनों ही अलग-अलग सुरक्षा दीवारों (प्राचीर) से घिरे हुए थे।
  • भवन निर्माण एवं कच्ची ईंटें: यहाँ अधिकांश मकान कच्ची ईंटों (धूप में सुखाई गई ईंटें) से बनाए गए थे, जिस कारण इसे पुरातात्विक संदर्भ में 'दीन-हीन बस्ती' भी कहा गया है। ईंटों का मानक अनुपात 4:2:1 था। हालाँकि, मुख्य मार्गों और विशिष्ट संरचनाओं में पक्की एवं अलंकृत ईंटों (Decorated Bricks) के प्रयोग के भी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
  • उत्कृष्ट जल निकासी (नालियाँ): कालीबंगा में नगर की स्वच्छता हेतु जल निकासी की अनूठी व्यवस्था थी। उत्खनन में पक्की ईंटों के साथ-साथ काष्ठ (लकड़ी) की नालियों के उपयोग का विश्व में एकमात्र साक्ष्य यहाँ प्राप्त हुआ है। लकड़ी को उकेरकर बनाई गई ये नालियाँ तत्कालीन इंजीनियरिंग और तकनीकी ज्ञान का अद्भुत प्रमाण हैं।

कालीबंगा से प्राप्त प्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य एवं पुरासामग्रियाँ

कालीबंगा के उत्खनन से अनेक ऐसे अद्वितीय साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जिन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास और तकनीकी क्षमता की दिशा में कई नए तथ्य स्थापित किए हैं:

1. विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत (Ploughed Field Evidence)

कालीबंगा के प्राक्-हड़प्पा स्तर से प्राप्त विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत के साक्ष्य यहाँ की सबसे महान खोजों में से एक हैं। यह खेत नगर प्राचीर के बाहर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित था। इसमें हल से जोती गई आड़ी और तिरछी रेखाओं के निशान (Grid Pattern) स्पष्ट मिले हैं। यह साक्ष्य दर्शाता है कि यहाँ के निवासी एक ही खेत में एक साथ दो फसलें उगाने की तकनीक (Dual Cropping System) से परिचित थे। पुरातात्विक विश्लेषण के अनुसार यहाँ चना और सरसों की फसल एक साथ बोई जाती थी।

2. सात आयताकार अग्नि वेदिकाएँ (Seven Fire Altars)

कालीबंगा के दुर्ग क्षेत्र तथा रिहाइशी मकानों से सात आयताकार अग्नि वेदिकाएँ (यज्ञ कुण्ड) एक पंक्ति में स्थापित मिली हैं। इन अग्नि वेदिकाओं में राख, कोयला, मिट्टी की पकी गोलियाँ (Terracotta Cakes) तथा पशुओं (विशेषकर ऊँट एवं बकरी) की हड्डियाँ मिली हैं। यह साक्ष्य स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि यहाँ के समाज में अग्नि पूजा, धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ प्रथा एवं पशु बलि का प्रचलन था।

3. प्राचीनतम भूकंप के पुरातात्विक प्रमाण (Seismic Evidence)

कालीबंगा के प्रथम एवं द्वितीय चरण (प्राक्-हड़प्पा काल) की दीवारों और मकानों के अवशेषों में दरारें पाई गई हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार लगभग 2600 ईसा पूर्व प्राकृतिक आपदा के रूप में आए भूकंप का यह विश्व में प्राचीनतम अभिलेखित साक्ष्य है। माना जाता है कि इस भूकंप और तत्पश्चात नदी के मार्ग परिवर्तन या सूखने के कारण प्राक्-हड़प्पा बस्ती नष्ट हुई थी और पुनः नए सिरे से विकसित सभ्यता स्थापित हुई।

4. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं बेलनाकार मुहर (Cylindrical Seal)

उत्खनन से कालीबंगा में एक बेलनाकार मुहर (Cylindrical Seal) प्राप्त हुई है। इस प्रकार की बेलनाकार मुहरें प्राचीन मेसोपोटामिया (सुमेरियन सभ्यता) की पहचान थीं। यह साक्ष्य सिद्ध करता है कि कालीबंगा का मेसोपोटामिया की सभ्यता के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुदूर समुद्री व स्थलीय व्यापारिक संबंध स्थापित था।

5. शवाधान पद्धतियाँ एवं शल्य चिकित्सा के साक्ष्य

कालीबंगा में मृतकों के अंतिम संस्कार (शवाधान) की तीन प्रमुख पद्धतियाँ प्रचलित थीं:

  • पूर्ण समाधीकरण (Complete Burial): आयताकार गड्ढों में शव को उत्तर-दक्षिण दिशा में लिटाकर गाड़ना।
  • आंशिक समाधीकरण (Partial Burial): केवल अवशेषों को समाधित करना।
  • दाह कर्म/कलश शवाधान (Pot Burial): गोल गड्ढों में अस्थि-अवशेषों को कलश में रखकर दफनाना।

एक बच्चे की खोपड़ी (Skull) का अवशेष भी मिला है जिसमें 6 छिद्र बने हुए हैं और हाइड्रोसिफ़लस (मस्तिष्क शोथ) की बीमारी के उपचार हेतु किए गए ऑपरेशन के संकेत मिलते हैं। इसे प्राचीन भारत में शल्य चिकित्सा (Trepanation/Surgery) का प्राचीनतम साक्ष्य माना जाता है।

संरक्षण एवं कालीबंगा संग्रहालय (1983)

कालीबंगा से प्राप्त अमूल्य पुरासामग्रियों, मृदभांडों, चूड़ियों, मुहरों, तांबे के उपकरणों तथा खिलौनों के वैज्ञानिक संरक्षण, अनुसंधान एवं जनसामान्य के अवलोकन हेतु वर्ष 1983 में हनुमानगढ़ में 'कालीबंगा संग्रहालय' की स्थापना की गई। यह संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है और राजस्थान के गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

निष्कर्ष एवं परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व

कालीबंगा केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय कृषि, नगर नियोजन, विदेशी व्यापार और धार्मिक पद्धतियों का केंद्र बिंदु रहा है। प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं (जैसे UPSC, RPSC, PCS, NET/JRF) की दृष्टि से यहाँ से प्राप्त जुते हुए खेत, सात अग्नि वेदिकाएँ, भूकंप के साक्ष्य, काष्ठ की नालियाँ तथा मेसोपोटामिया की बेलनाकार मुहर अत्यधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न क्षेत्र हैं।

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⚡ त्वरित पुनरावलोकन (One-Liner Matrix)

📅 महत्वपूर्ण तिथियां एवं घटनाक्रम (Timeline Matrix)

  • 1952: कालीबंगा सभ्यता की खोज - अम्लानंद घोष द्वारा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे इस प्रागैतिहासिक स्थल की पहचान की गई।
  • 1961-1969: व्यापक उत्खनन कार्य - बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर के नेतृत्व में पाँच स्तरों पर विस्तृत पुरातत्व उत्खनन संपन्न हुआ।
  • 1983: कालीबंगा संग्रहालय की स्थापना - उत्खनन से प्राप्त अवशेषों और पुरासामग्रियों के संरक्षण तथा प्रदर्शन हेतु हनुमानगढ़ में संग्रहालय स्थापित किया गया।

👤 प्रमुख व्यक्तित्व एवं योगदान

  • अम्लानंद घोष: 1952 में प्रथम बार कालीबंगा स्थल की पहचान एवं खोज की।
  • बी. बी. लाल (बृजवासी लाल): 1961 से 1969 तक मुख्य उत्खननकर्ता के रूप में कार्य किया तथा हड़प्पा कालीन साक्ष्यों को उजागर किया।
  • बी. के. थापर (बालकृष्ण थापर): बी. बी. लाल के साथ मिलकर उत्खनन कार्य का सह-निर्देशन किया।
  • एल. पी. टेसीटोरी: प्रथम विद्वान जिन्होंने स्वतंत्रता पूर्व इस क्षेत्र में प्राचीन अवशेष होने की ओर ध्यान आकर्षित किया था।

⚖️ महत्वपूर्ण कानूनी / संवैधानिक प्रावधान

  • जुते हुए खेत के साक्ष्य: प्राक्-हड़प्पा स्तर से विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत तथा एक साथ दो फसलें (चना व सरसों) उगाने के प्रमाण।
  • सात अग्नि वेदिकाएँ: धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ प्रथा एवं पशु बलि के संकेत देने वाली आयताकार अग्नि वेदिकाएँ।
  • काले रंग की चूड़ियाँ: स्थल का नामकरण 'कालीबंगा' (काले रंग की चूड़ियाँ) यहाँ अत्यधिक मात्रा में पाई गई मिट्टी एवं काँच की चूड़ियों के आधार पर हुआ।
  • भूकंप के साक्ष्य: सभ्यता के विनाश और प्राकृतिक आपदा के रूप में प्राचीनतम भूकंप के पुरातात्विक प्रमाण।
  • काष्ठ एवं ईंटों की नालियाँ: उत्कृष्ट नगर नियोजन के अंतर्गत जल निकासी हेतु लकड़ी की नालियाँ एवं कच्ची-पक्की ईंटों के साक्ष्य।
  • बेलनाकार मुहर (Cylindrical Seal): मेसोपोटामिया की सभ्यता के साथ व्यापारिक संबंधों को दर्शाने वाली बेलनाकार मुहरें।
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📊 तुलनात्मक अध्ययन तालिका

वर्ष / कालखंड प्रमुख घटना / व्यक्तित्व महत्त्व एवं पुरातात्विक साक्ष्य
स्वतंत्रता पूर्व डॉ. एल. पी. टेसीटोरी (L.P. Tessitori) इस क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता के पुरातात्विक अवशेष होने की ओर प्रथम बार ध्यान आकर्षित किया।
1952 अम्लानंद घोष (Amlananda Ghosh) कालीबंगा स्थल की सर्वप्रथम पहचान एवं ऐतिहासिक खोज की।
1961 - 1969 बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर पाँच स्तरों पर व्यापक वैज्ञानिक उत्खनन संपन्न कराया; प्राक्-हड़प्पा व विकसित हड़प्पा काल के साक्ष्य उजागर किए।
1983 कालीबंगा संग्रहालय की स्थापना हनुमानगढ़ में उत्खनन से प्राप्त अवशेषों के स्थायी संरक्षण और प्रदर्शन हेतु संग्रहालय स्थापित किया गया।
प्राक्-हड़प्पा स्तर कृषि साक्ष्य विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत के साक्ष्य; एक साथ दो फसलें (चना एवं सरसों) उगाने का प्रमाण।
विकसित हड़प्पा स्तर धार्मिक साक्ष्य एक पंक्ति में स्थित सात आयताकार अग्नि वेदिकाएँ (यज्ञ कुण्ड) एवं पशु बलि के अवशेष।
प्राकृतिक आपदा भू-गर्भीय साक्ष्य दीवारों में दरारों के आधार पर विश्व में प्राचीनतम भूकंप के पुरातात्विक साक्ष्य।
व्यापारिक साक्ष्य विदेशी संबंध मेसोपोटामिया की सभ्यता से व्यापारिक संबंधों को दर्शाने वाली बेलनाकार मुहर (Cylindrical Seal)।

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🎯 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Self-Test MCQs)

Q1. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित कालीबंगा प्रागैतिहासिक स्थल की पहचान एवं खोज सर्वप्रथम 1952 में किसके द्वारा की गई थी?
(A) बी. बी. लाल | (B) बी. के. थापर | (C) अम्लानंद घोष | (D) एल. पी. टेसीटोरी
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (C)
अम्लानंद घोष ने 1952 में प्रथम बार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे कालीबंगा स्थल की पहचान एवं खोज की थी।
Q2. स्वतंत्रता से पूर्व कालीबंगा क्षेत्र में प्राचीन पुरातात्विक अवशेष होने की ओर सबसे पहले ध्यान आकर्षित करने वाले विद्वान कौन थे?
(A) एल. पी. टेसीटोरी | (B) अम्लानंद घोष | (C) बी. बी. लाल | (D) बी. के. थापर
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (A)
एल. पी. टेसीटोरी प्रथम विद्वान थे जिन्होंने स्वतंत्रता पूर्व इस क्षेत्र में प्राचीन अवशेष होने की ओर ध्यान आकर्षित किया था।
Q3. वर्ष 1961 से 1969 के मध्य बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर के नेतृत्व में कालीबंगा में विस्तृत उत्खनन कार्य कितने स्तरों पर संपन्न हुआ?
(A) तीन स्तरों पर | (B) चार स्तरों पर | (C) पाँच स्तरों पर | (D) सात स्तरों पर
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (C)
1961 से 1969 तक बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर के नेतृत्व में पाँच स्तरों पर विस्तृत पुरातत्व उत्खनन संपन्न हुआ।
Q4. कालीबंगा से प्राप्त प्राक्-हड़प्पा स्तर के विश्व के प्राचीनतम 'जुते हुए खेत' के साक्ष्य में एक साथ कौन-सी दो फसलें उगाने के प्रमाण मिलते हैं?
(A) गेहूँ और जौ | (B) चना और सरसों | (C) चावल और बाजरा | (D) कपास और तिल
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा के प्राक्-हड़प्पा स्तर से एक साथ दो फसलें (चना व सरसों) उगाने के प्राचीनतम प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
Q5. उत्खनन से प्राप्त पुरासामग्रियों के संरक्षण एवं प्रदर्शन हेतु 'कालीबंगा संग्रहालय' की स्थापना किस वर्ष और कहाँ की गई थी?
(A) 1952 में, जयपुर | (B) 1961 में, घग्घर | (C) 1983 में, हनुमानगढ़ | (D) 1969 में, बीकानेर
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (C)
1983 में उत्खनन से प्राप्त अवशेषों के संरक्षण तथा प्रदर्शन हेतु हनुमानगढ़ में कालीबंगा संग्रहालय स्थापित किया गया।
Q6. कालीबंगा से प्राप्त आयताकार सात अग्नि वेदिकाएँ मुख्य रूप से किस बात का संकेत देती हैं?
(A) उत्कृष्ट नगर नियोजन एवं जल निकासी | (B) धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ प्रथा एवं पशु बलि | (C) मेसोपोटामिया के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार | (D) प्राकृतिक आपदा एवं विनाश
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा से मिली सात आयताकार अग्नि वेदिकाएँ धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ प्रथा एवं पशु बलि का संकेत देती हैं।
Q7. इस प्रागैतिहासिक स्थल का नामकरण 'कालीबंगा' रखे जाने का मुख्य कारण क्या था?
(A) घग्घर नदी के काले रंग का जल | (B) अत्यधिक मात्रा में पाई गई काले रंग की मिट्टी एवं काँच की चूड़ियाँ | (C) उत्खनन में मिली काली पकी हुई ईंटें | (D) काले रंग की बेलनाकार मुहरें
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
स्थल का नाम 'कालीबंगा' यहाँ अत्यधिक मात्रा में पाई गई काले रंग की मिट्टी एवं काँच की चूड़ियों के आधार पर पड़ा।
Q8. कालीबंगा से मिली 'बेलनाकार मुहर' (Cylindrical Seal) किस प्राचीन विदेशी सभ्यता के साथ व्यापारिक संबंधों को दर्शाती है?
(A) मिस्र की सभ्यता | (B) मेसोपोटामिया की सभ्यता | (C) चीन की सभ्यता | (D) यूनानी सभ्यता
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा से प्राप्त बेलनाकार मुहर मेसोपोटामिया की सभ्यता के साथ व्यापारिक संबंधों को दर्शाती है।
Q9. सभ्यता के विनाश और प्राकृतिक आपदा के रूप में विश्व के प्राचीनतम 'भूकंप' के पुरातात्विक साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुए हैं?
(A) अम्लानंद नगर | (B) कालीबंगा | (C) हनुमानगढ़ शहर | (D) मेसोपोटामिया
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा से सभ्यता के विनाश और प्राकृतिक आपदा के रूप में प्राचीनतम भूकंप के पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं।
Q10. कालीबंगा के उत्कृष्ट नगर नियोजन के अंतर्गत जल निकासी हेतु किन सामग्रियों की नालियों के साक्ष्य मिले हैं?
(A) केवल पक्की ईंटों की नालियाँ | (B) लकड़ी (काष्ठ) एवं ईंटों की नालियाँ | (C) तराशे गए पत्थरों की नालियाँ | (D) केवल मिट्टी की बंद नालियाँ
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
उत्कृष्ट नगर नियोजन के अंतर्गत जल निकासी हेतु लकड़ी (काष्ठ) की नालियाँ एवं कच्ची-पक्की ईंटों के साक्ष्य मिले हैं।
Q11. बालकृष्ण थापर (बी. के. थापर) का कालीबंगा सभ्यता के उत्खनन में क्या योगदान रहा?
(A) 1952 में स्थल की प्रथम बार खोज करना | (B) स्वतंत्रता पूर्व इस क्षेत्र की ओर ध्यान आकर्षित करना | (C) बी. बी. लाल के साथ मिलकर उत्खनन कार्य का सह-निर्देशन करना | (D) 1983 में संग्रहालय की स्थापना करना
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (C)
बी. के. थापर ने बी. बी. लाल के साथ मिलकर 1961 से 1969 तक कालीबंगा उत्खनन कार्य का सह-निर्देशन किया।
Q12. 1961 से 1969 तक कालीबंगा में मुख्य उत्खननकर्ता के रूप में कार्य करते हुए हड़प्पा कालीन साक्ष्यों को उजागर करने का श्रेय किसे जाता है?
(A) बृजवासी लाल (बी. बी. लाल) | (B) अम्लानंद घोष | (C) एल. पी. टेसीटोरी | (D) बालकृष्ण शर्मा
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (A)
बी. बी. लाल (बृजवासी लाल) ने 1961 से 1969 तक मुख्य उत्खननकर्ता के रूप में कार्य किया तथा हड़प्पा कालीन साक्ष्यों को उजागर किया।
Q13. कालीबंगा स्थल किस नदी के किनारे स्थित है?
(A) सरस्वती नदी | (B) घग्घर नदी | (C) बनास नदी | (D) कांतली नदी
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा स्थल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित है।
Q14. कालीबंगा प्रागैतिहासिक स्थल वर्तमान में भारत के किस राज्य व जिले में स्थित है?
(A) पंजाब के रूपनगर में | (B) हरियाणा के हिसार में | (C) राजस्थान के हनुमानगढ़ में | (D) गुजरात के लोथल में
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (C)
कालीबंगा स्थल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है।
Q15. कालीबंगा में पाई गई अग्नि वेदिकाओं का ज्यामितीय आकार कैसा था?
(A) वृत्ताकार | (B) आयताकार | (C) त्रिभुजाकार | (D) षट्कोणीय
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा में धार्मिक अनुष्ठान हेतु आयताकार अग्नि वेदियाँ पाई गई हैं।
Q16. विश्व के प्राचीनतम 'जुते हुए खेत' के साक्ष्य कालीबंगा के किस सांस्कृतिक स्तर से प्राप्त हुए हैं?
(A) प्राक्-हड़प्पा स्तर से | (B) उत्तर-हड़प्पा स्तर से | (C) मध्य-हड़प्पा स्तर से | (D) मौर्य कालीन स्तर से
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (A)
जुते हुए खेत के साक्ष्य कालीबंगा के प्राक्-हड़प्पा स्तर से प्राप्त हुए हैं।
Q17. कालीबंगा में व्यापक उत्खनन कार्य किस समयावधि के दौरान संपन्न हुआ था?
(A) 1950-1952 | (B) 1961-1969 | (C) 1971-1975 | (D) 1983-1990
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
1961-1969 के दौरान बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर के नेतृत्व में व्यापक उत्खनन कार्य हुआ।
Q18. कालीबंगा से अत्यधिक मात्रा में पाई गई चूड़ियाँ मुख्य रूप से किन दो पदार्थों से निर्मित थीं?
(A) ताँबा एवं पीतल | (B) मिट्टी एवं काँच | (C) लकड़ी एवं पत्थर | (D) सोना एवं चाँदी
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
कालीबंगा में अत्यधिक मात्रा में मिट्टी एवं काँच की चूड़ियाँ पाई गई थीं।
Q19. 1983 में स्थापित कालीबंगा संग्रहालय का मुख्य कार्य क्या है?
(A) केवल नए पुरातात्विक स्थलों की खोज करना | (B) उत्खनन से प्राप्त अवशेषों और पुरासामग्रियों का संरक्षण तथा प्रदर्शन | (C) मेसोपोटामिया की मुहरों का आयात-निर्यात करना | (D) प्राचीन नालियों का निर्माण करना
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (B)
1983 में हनुमानगढ़ में स्थापित संग्रहालय का मुख्य कार्य उत्खनन से प्राप्त पुरासामग्रियों का संरक्षण और प्रदर्शन करना है।
Q20. कालीबंगा में पाई गई कौन-सी विशिष्ट संरचना जल निकासी व्यवस्था की श्रेष्ठता और नगर नियोजन को दर्शाती है?
(A) काष्ठ (लकड़ी) एवं ईंटों की नालियाँ | (B) आयताकार अग्नि वेदिकाएँ | (C) बेलनाकार मुहरें | (D) जुते हुए खेत
👉 उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: Option (A)
उत्कृष्ट नगर नियोजन के अंतर्गत जल निकासी हेतु काष्ठ (लकड़ी) की नालियों तथा ईंटों के साक्ष्य कालीबंगा की विशेषता हैं।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: कालीबंगा सभ्यता की खोज किसने और कब की थी?
A: कालीबंगा सभ्यता की खोज सर्वप्रथम 1952 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद अम्लानंद घोष द्वारा की गई थी। इसके पश्चात 1961 से 1969 के दौरान बी. बी. लाल (बृजवासी लाल) और बी. के. थापर (बालकृष्ण थापर) के नेतृत्व में यहाँ व्यापक उत्खनन कार्य संपन्न हुआ।

Q: 'कालीबंगा' शब्द का अर्थ क्या है और यह नाम क्यों पड़ा?
A: 'कालीबंगा' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'काले रंग की चूड़ियाँ' (काली = काला, बंगा = चूड़ी) होता है। उत्खनन के दौरान यहाँ मिट्टी एवं काँच की काले रंग की चूड़ियाँ प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुई थीं, जिसके आधार पर इस स्थल का नाम कालीबंगा पड़ा।

Q: कालीबंगा से प्राप्त जुते हुए खेत की क्या विशेषता है?
A: कालीबंगा के प्राक्-हड़प्पा कालीन स्तर से विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं। इस खेत में हल की आड़ी-तिरछी रेखाओं (ग्रिड पैटर्न) से पता चलता है कि यहाँ एक ही समय में एक साथ दो फसलें (चना और सरसों) उगाई जाती थीं।

Q: कालीबंगा से धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कौन से प्रमुख साक्ष्य मिले हैं?
A: धार्मिक दृष्टिकोण से यहाँ 7 आयताकार अग्नि वेदिकाएँ (यज्ञ कुण्ड) और पशु बलि के प्रमाण मिले हैं। वैज्ञानिक एवं चिकित्सीय दृष्टिकोण से यहाँ एक बालक की खोपड़ी में 6 छिद्र पाए गए हैं, जो प्राचीनतम शल्य चिकित्सा (Trepanation) का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

Q: कालीबंगा के सुदूर व्यापारिक संबंधों का क्या प्रमाण है?
A: कालीबंगा से मेसोपोटामिया (सुमेरियन सभ्यता) की शैली की एक बेलनाकार मुहर (Cylindrical Seal) प्राप्त हुई है, जो यह सिद्ध करती है कि कालीबंगा का मेसोपोटामिया के साथ प्रत्यक्ष व्यापारिक संबंध था।

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